धीरेन्द्र मिश्रा/ कैनविज टाइम्स
लखनऊ। अन्तर्राष्ट्रीय बाल दिवस पर राजधानी में बच्चों के अधिकारों से जुड़े हर मुद्दे पर सोमवार को गहन मंथन किया गया। जिसको लेकर पहली बार उत्तर प्रदेश में समागम समिट 2023 नाम से किये गये इस नवाचार के दौरान सरकार के साथ सिविल सोसाइटी और कार्पोरेट के प्रतिष्ठित प्रतिनिधि एक मंच पर बैठे और तय किया कि समन्वित प्रयासों से सूबे में बच्चों के हालात बदले जाएंगे। आयोजन के दौरान बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल स्वास्थ्य और बाल पोषण जैसे मुद्दों पर पैनल डिस्कसन के बाद ठोस कार्ययोजना भी तैयार की गयी। समागम समिट का शुभारम्भ उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के हितों के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, समागम समिट का जो निष्कर्ष निकले उससे उन्हें अवश्य अवगत कराया जाए। उन्होने कहा कि बच्चों के हित में जो निष्कर्ष सामने आएंगे उनको लागू करने के लिए अगर सरकार को नीतियों में परिवर्तन करना पड़ा तो वह भी किया जाएगा। बच्चों के साथ और बच्चों के लिए काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों के साथ बैठने के लिए भी सरकार हमेशा तैयार है। प्रदेश सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भी समिट को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदली है।
शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर देने की आवश्यकता है जिसमें स्वयंसेवी संगठन अहम भूमिका निभा सकते हैं। सरकार अपना काम कर रही है और बदलाव ला रही है लेकिन सिविल समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। वहीं केन्द्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर का प्रतिनिधित्व करते हुए मोहनलालगंज के विधायक अमरीश रावत ने भी केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों की चर्चा की और कहा कि बच्चों के हित में हर एक जरूरी कदम उठाया जाएगा। सेफ स

