काकोरी के मीठेनगर में कई महीनों से आतंक मचा रहे बाघ को आखिरकार पकड़ लिया गया। वन विभाग की टीम ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज किया।
तीन दिसंबर को मीठेनगर के खेत में देखे गए बाघ को वन विभाग ने बड़ी बिल्ली बताया था, लेकिन रहमान खेड़ा केंद्रीय उपोष्ण वैज्ञानिक संस्थान के ब्लॉक नंबर चार में नील गाय का शिकार करने वाले बाघ को 11 दिसंबर को शाम के समय मोबाइल कैमरे में कैद किया गया था।
बारह दिसंबर को वहां पर ही नील गाय का अवशेष मिलने के बाद ही बाघ को पकडऩे के लिए वन विभाग जुट गया था। करीब तीन माह का समय हो चुका है और बाघ ने 20 पशुओं का शिकार किया है, जिसमें तीन पड़वा भी हैं, जिसे वन विभाग ने बाघ को पकडने के लिए बांधा था।सोमवार रात भी उसने पड़वा को मारा था। थर्मल ड्रोन से लेकर ट्रैंक्युलाइज गन के साथ ही सीसीसीटीवी कैमरे के साथ ही लाइव कैमरे लगाए गए हैं। मचान से निगरानी के साथ ही पिंजरे थे जाल भी लगाया गया। दुधवा नेशनल पार्क से हथिनियां डायना और सुलोचना को लेकर काम्बिंग कराई जा रही थी और करीब दस से अधिक विशेषज्ञों टीम आकर जा चुकी थी और उनका क्रमवार आना जारी था।
