टोरेस घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई और जयपुर में 13 स्थानों पर तलाशी ली है। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। इसके अलावा मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड और उसके सहयोगियों से जुड़े कुल ₹21.75 करोड़ के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। ईडी को बैंक खाते की जांच से संकेत मिला है कि बिचौलिए ललन सिंह से जुड़ी विभिन्न डमी संस्थाओं से मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड के खातों में ₹13.78 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई थी। इस राशि का उपयोग मुंबई में टोरेस ज्वेलरी के व्यावसायिक संचालन को स्थापित करने के लिए किया गया था।
ईडी ने मुंबई और जयपुर में विभिन्न परिसरों में तलाशी ली है, जिसमें मुंबई के उमरखड़ी में मेसर्स प्लेटिनम हर्न प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सर्वेश सुर्वे का आवासीय परिसर, जयपुर के किशनपोल बाजार में मेसर्स जेमेथिस्ट और जयपुर के जौहरी बाजार और मुंबई के कालबादेवी में मेसर्स स्टेलर ट्रेडिंग कंपनी जैसी संबद्ध संस्थाओं के कार्यालय शामिल हैं। ईडी ने मुंबई के मुलुंड में एक प्रमुख सहयोगी ललन सिंह के आवासीय परिसरों और मुंबई के ओपेरा हाउस में एक संदिग्ध हवाला ऑपरेटर अल्पेश प्रवीणचंद्र खारा के आवासीय परिसरों की भी तलाशी ली।
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद टोरेस घोटाले को लेकर मुंबई आर्थिक अपराध शाखा के साथ गुरुवार को नवी मुंबई, ठाणे और मीरा-भाईंदर पुलिस की संयुक्त बैठक हुई। इसमें एक SIT का गठन किया गया। अब ठाणे, नवी मुंबई और मीरा -भाईंदर पुलिस मुंबई EOW के साथ मिलकर मामले की जांच करेगी। सभी टीम से दो पुलिस इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है। SIT टीम आर्थिक अपराध शाखा के जॉइंट सीपी निशीथ मिश्रा को रिपोर्ट करेगी।
EOW के डीसीपी संग्राम सिंह निशाणदार ने बताया कि यह घोटाला करीब 95 करोड़ रुपये का हो चुका है। करीब सात हजार लोग अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। जबकि मुंबई से बाहर कुल 400 शिकायतें दर्ज हुई हैं। EOW की कई टीम महाराष्ट्र के संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
